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Tuesday, 6 September 2016

शायरी

तुम हो मेरी आँखों में ओझल तो मैं
रह नही सकता
बिना तेरे इकपल भी मैं
रह नही सकता
दिल मे धड़कन तुम्हारी
हसरत को आरज़ू तुम्हारी
करता हूँ कितना प्यार तुमसे मैं
कह नही सकता


                                                           न वो आ सके न हम कभी जा सके
                                                           न दर्द दिल का किसी को सुना सके
                                                                 बस बैठे है यादों में उनकी
                                                  उन्होंने याद किया और न हम उनको भुला सके


                                                अगर खुश है वो देखकर अश्क हमारी आँखों में
                                                        खुदा कसम हम मुस्कराना छोड़ देंगे
                                                               तड़पते रहेंगे उन्हें देखनो को
                                                      पर उनकी तरफ नजरें उठाना छोड़ देंगे


तकदीर लिखने वाले एक एहसान लिख दे
मेरे प्यार की तकदीर में मुस्कान लिख दे
ना मिले जिंदगी में कभी भी दर्द उसको
चाहे उसकी किस्मत में मेरी जान लिख दे


जब इश्क़ को खुदा ने बनाया होगा
तब खुद खुदा ने इसे आजमाया होगा
हमारी औकात ही क्या
कमबख्त इश्क़ ने खुद को भी रुलाया होगा


तेरी धड़कन ही ज़िंदगी का किस्सा है मेरा
                                                       तू ज़िंदगी का एक अहम् हिस्सा है मेरा
                                                   मेरी मोहब्बत तुझसे, सिर्फ़ लफ्जों की नहीं है
                                                       तेरी रूह से रूह तक का रिश्ता है मेरा


सिर्फ इशारों में होती महोब्बत अगर
इन अलफाजों को खुबसूरती कौन देता
बस पत्थर बन के रह जाता ‘ताज महल
अगर इश्क इसे अपनी पहचान ना देता


जब से एक लम्हा तेरे साथ जिया है
कमी को तेरे हरपल महसूस किया है
बन गया में गुनाहगार खुदा की नजर में
क्योंकि उससे पहले मैंने तेरा नाम लिया है


अब नींद की तलब नहीं रही 
रातों को जागना अच्छा लगता है
मुझे मालूम है वो शख्स मेरी किस्मत में नहीं
पर उसे खुदा से माँगना अच्छा लगता है


क्यों हमे किसी की तलाश होती है
क्यों दिल को किसी की आश होती है
चाँद को देखो वो भी तन्हा है
जबकि चाँदनी से हर रात उसकी मुलाक़ात होती है


आँखें खोलूँ तो चेहरा तुम्हारा हो
आँखें बंद करु तो सपना तुम्हारा हो
गर मर भी गया तो कोई गम नहीं
अगर कफ़न की जगह दुपट्टा तुम्हारा हो


मोहब्बत के दीप जलाकर तो देखो 
जरा दिल की दुनिया सजा कर तो देखो
तुम्हे हो ना जाये मोहब्बत तो कहना 
जरा हमसे नजरें मिलाकर तो देखो


मेरे मरने के बाद , मुझे जलाने से पहले
मेरा दिल निकल लेना
कही ऐसा ना हो कि वो भी जल जायें
जो मेरे दिल में रहते हैं


सपना कभी साकार नहीं होता
प्यार का कोई आकार नहीं होता
सबकुछ हो जाता है इस दुनिया में
मगर दोबारा किसी से सच्चा प्यार नहीं होता


न तंग करो हम भी सताये हुये हैं 
मोहब्बत का गम दिल पर उठाये हुये हैं
खिलौना समझकर हमसे न खेलो 
हम भी उसी खुद के बनाये हुये हैं


खुदा इक पल उसे मेरी बना दे
कितना चाहते हैं उसे कोई बात दे
हरपल देखूँ ख्वाब उसी के
ना जागूँ ऐसी नींद सुला दे


उन्हें तो फुरसत ही नहीं हमें याद करने की 
हमारा वक़्त गुजरता है उनकी फरियाद करके
वो आये मेरी लाश पे तो ये कहना
अभी सोया है तुझे याद करके

हर कोई तुमसा खास नहीं होता 
जो खास होता है वो कभी पास नहीं होता
यकीन ना आये तो चाँद को ही देख लो
जिसके दूर होते हुये भी दूरी का अहसास नहीं होता


चाहते थे जिन्हें चाहत से ज्यादा
वो हमारी चाहत को समझते नहीं
दिल में बसी हुयी है तस्वीर जिनकी
उनको भुलाकर भी हम भूल सकते नहीं


आदत है तेरी याद आने की 
इन आँखों को तेरी इक झलक पाने की
हमारी तो तमन्ना है आपको पाने की
पर शायद आपकी आदत है हमें तड़पाने की


हमारी उस सितारे से दोस्ती हो गई
जिसे देखकर सबेरा हो जाये
सोचा चुरा लूँ उसे आसमां से
फिर सोचा कभी
आसमान में अँधेरा न हो जाये


और कुछ नहीं चाहिए बस एक मौसम ही काफी है
दिल में मेरे अरमान ही काफी हैं
अरमान है कि सदा खुश रख सकूँ तुझे
मुझे याद और साथ रखना
बस इतना अहसान ही काफी है


विस्वास बनकर लोग जिन्दगी में आते हैं
ख्वाब बनकर आँखों में समा जाते हैं
पहले तो ये यकीन दिलाते हैं
कि वो हमारे हैं
फिर ना जाने क्यू तन्हा छोड़ जाते हैं


दूंरियां बहुत है पर इतना समझ लो
पास रहकर भी कोई रिश्ता खास नहीं होता
आप दिल के करीब हैं इतने
कि दूंरियों का कभी अहसास नहीं होता


माना भूल जाना आपकी फितरत ही सही
मगर हमें भूल जाना आपकी किश्मत में नहीं
यकीन न हो तो आजमा के देख लेना
खुद को भूल जाओगे पर हमें नहीं


मोहब्बत के दुश्मनों का संसार न रहे
काँटों से फूलों का सिंगार न रहे
करें बदनाम इसकदर दुनिया वाले
की मेरे सिवा कोई तेरा हक़दार न रहे


जानकार भी वो मुझे जान न पाये
आजतक वो मुझे पहचान न पाये
खुद ही कर ली बेवफाई हमने
ताकि उनपर कोई इल्जाम न आये


हम कभी अपनों से खफा नहीं होते
प्यार के रिश्ते कभी बेवफा नहीं होते
आप भले ही हमें भुलाकर सो जाओ
आपको याद किये बिना हम नहीं सोते


जिन्दगी एक चाहत का सिलसिला है
कोई मिल जाता है कोई बिछुड़ जाता है
जिसे माँगते हैं अपनी दुआ में
वो किसी और को बिन माँगे मिल जाता है


फुरसत किसे है जख्मों पर मरहम लगाने की
निगाहें बदल गई अपने और बेगाने की
तुम न छोड़ना प्यार का साथ कभी
वरना तमन्ना न रहेगी किसी का प्यार पाने की


तुम्हारी दुनिया से जाने के बाद
हम तुम्हे हर तारें में नजर आया करेंगे
तुम हर पल कोई दुआ माँग लेना
हम पल पल टूट जाया करेंगे


न तस्वीर है तुम्हारी जो दीदार किया जाये
न तुम पास हो जो प्यार किया जाये
ये कौन सा दर्द दिया है आपने
न कुछ कहा जाये न तुम बिन रहा जाये


रोयेंगी ये आँखें मुस्कराने के बाद
आएगी रात दिन ढल जाने के बाद
कभी रूठना न आप मुझसे
शायद ये जिन्दगी न रहे तेरे रुठ जाने के बाद


हर आहत मेरे होने का अहसास दिलाएगी
हर हवा किस्सा हमारा सुनाएगी
हम भर देंगे आपके दिल में इतनी यादें
कि न चाहते हुये भी आपको हमारी याद आएगी


वो इनकार करते है इकरार के लिए
नफरत करते हैं तो प्यार के लिए
उल्टी चाल चलते हैं ये इश्क़ करने वाले
आँखें बंद करते हैं दीदार के लिए


इस कदर न हर बात यारों से पूँछों
जो बात राज की है इशारों से पूँछों
लहरों से तो खेलना समुन्दर का शौक है
लगती है चोट कैसी किनारों से पूँछों


तरसती नज़रों ने हर पल आपको माँगा
जैसे अमावस की रात ने चाँद को माँगा
रुठ गया खुदा भी हमसे 
जब हमने हर दुआ में आपके प्यार को माँगा


हिचकियाँ दिला कर ये कैसी उलझन बंधा रहे हो
आँखें बंद हैं फिर भी नजर आ रहे हो
बस इतना बता दो
हमें याद कर रहे हो या अपनी याद दिला रहे हो


उनके लिए जब हमने भटकना छोड़ दिया
याद में जब उनकी तड़पना छोड़ दिया
वो रोये बहुत आकर तब मेरे पास
जब हमारे दिल ने धड़कना छोड़ दिया


अंदाज निगाहों का जब जुबाँ पर आएगा
उस दिन तुम्हे चेहरा हमारा याद आयेगा
याद करोगे तुम उस दिन हमें
जिस दिन
ये तंग करने वाला इस जहाँ से चला जायेगा


एक कसक दिल में दबी रह गई
हँसते हँसते आँखों में कुछ नमी रह गई
इतनी उल्फत के बाद भी वो मेरे न हुए
शायद मेरी मोहब्बत में कुछ कमी रह गई


जीने की हर अदा दी है
हंसी की हर बजह दी है
मेरे खुदा उसको हर ख़ुशी देना
जिसने मुझे अपने दिल में जगह दी है


आपकी मुस्कान हमारी कमजोरी है
कह न पाना हमारी मजबूरी है
आप क्यूँ नहीं समझते हमारी ख़ामोशी को
क्या खमोशी को जुबान देना जरूरी है


एक काँच ने पत्थर से मोहब्बत कर ली
टकराकर उसने अपनी जिंदगी चकनाचूर कर ली
काँच की दीवानगी तो देखो
उसने अपने हर टुकड़ों में
उसकी तस्वीर भर ली


हर सांस के साथ तुम्हारा सलाम आता है
हर आहात के साथ तुम्हारा पैगाम आता है
ये कैसा है यादों का सिलसिला
जब भी खुदा का नाम लेता हूँ
तो होठों पर तेरा नाम आ जाता है


यह रात इतनी तन्हा क्यूँ होती है
किस्मत में अपने सबको शिकायत क्यूँ होती है
ये किस्मत भी अजीब खेल खेलती है
जिसे हम पा नहीं सकते
उसी से मोहब्बत क्यूँ होती है


हसरत है तुझे पाने की
और कोई ख्वाहिश नहीं इस दीवाने की
शिकवा तुमसे नहीं खुदा से है मुझे
क्या जरूरत थी तुझे इतना खूबसूरत बनाने की


कोई न मिला ऐसा जिसपे दुनिया लुटा देते
सबने धोखा दिया किस किस को भुला देते
दिल का दर्द दिल में दबाये रखा है
गर बयाँ किया होता तो महफ़िल को रुला देते



Write soon...











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